पृथ्वीराज चौहान/Prithviraj Chauhan : History of a great leader.

पृथ्वीराज चौहान भारतीय इतिहास के सबसे प्रसिद्ध हिंदू राजपूत राजाओं में एक थे। पृथ्वीराज चौहान 1149 में राजस्थान के अजमेर  के महान योद्धा पृथ्वीराज चौहान अजमेर के महाराजा सोमेश्वर और कपूरी श्रीदेवी की संतान थे । जब पृथ्वीराज चौहान मात्र 11 वर्ष के तब उनके के सिर से पिता का साया उठ गया।

पृथ्वीराज चौहान 11 वर्ष की आयु में ही राज्य का कार्यभार संभाला और अपने दायित्व को बहुत अच्छी तरह से निभाते हुए लगातार अपने दुश्मनों को पराजित कर अपने राज्य और धर्म का विस्तार करते गए।

चौहान बचपन में शब्दभेदी बाण विद्या का अभ्यास किया था पृथ्वी राज को राज पिथौरा भी कहा जाता था। 

 पृथ्वीराज चौहान ने 17 बार मोहम्मद गौरी का युद्ध में परास्त किया और हर बार कमजोर गौरी को माफ कर के छोड़ दिया।  परंतु 18वीं बार मोहम्मद गोरी ने अपनी दुराचारी बुद्धि के साथ जैचंद की मदद से पृथ्वीराज चौहान को छल से युद्ध में मात देने में सफल हुआ और बंदी बनाकर अपने साथ ले गया पृथ्वीराज चौहान और चंद्रवरदाई दोनों बंदी बन गए थे और सजा के दौर पृथ्वीराज चौहान की आंखें गर्म सलाखों से फोड़ दी गई।

पृथ्वीराज चौहान


मोहम्मद गौरी के आदेश पर पृथ्वीराज चौहान के मंत्री प्रताप सिंह ने पृथ्वीराज को इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए समझाया परंतु वीर पृथ्वीराज चौहान को यह कतई स्वीकार ना था।


पृथ्वीराज चौहान आखरी में मोहम्मद से कहा कि मैं अपने मित्र चांद बरदाई के शब्दों पर शब्दभेदी बाण का उपयोग करना चाहता हूं, 

मोहम्मद गौरी को यह अंदाजा नहीं कि उसको यह बहुत भारी पड़ने वाला है, मोहम्मद गोरी अपने घमंड में चूर पृथ्वीराज चौहान को शब्दभेदी बाण चलाने की अनुमति दे दी,


चंद्रवरदाई द्वारा बोले गए शब्द:

"चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण, ता ऊपर सुल्तान है मत चुके चौहान" 

असल में बुद्धिमान चंद्रवरदाई ने मोहम्मद गौरी के सिंहासन का स्थान इन शब्दों के माध्यम से पृथ्वीराज चौहान को बताया और पृथ्वीराज चौहान ने सीधा निशाना मुहम्मद गौरी पर साध कर मोहम्मद गौरी को मौत के घाट पर उतार दिया।

इस भारत की वीर धरती पर ना जाने कितने अनेक योद्धाओं ने जन्म लिया है, हमारा संकल्प है कि हम इस पीढ़ी एवं आने वाली पीढ़ी को अपने महान योद्धाओं के बारे में बताएं साथ ही हम अपने पीढ़ी को यह भी अवगत कराएं कि मुगलों एवं अंग्रेजों ने हम पर शासन किया है, हम पर दुराचार किए हैं वह महान नहीं थे उनकी महानता केवल लोगों को परेशान एवं लोगों को कष्ट पहुंचाने तक सीमित था





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